क्या आदम को स्वर्ग मिलेगा?

Revelation

क्या आदम को स्वर्ग मिलेगा?

हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर एक मैंबर का यह सवाल हमारे सामने आया। मेरा उत्तर:

मैं सोचता हूँ कि जो परमेश्वर के वचन, राज्य और प्रभु के सानिध्य के बारे में सोचता है उसके मन में ढेरों सवाल आना स्वाभाविक भी है और ज़रूरी भी। यदि हम स्वर्ग, बाइबल और बाइबल के पात्रों के बारे में विचार नहीं करते तो हमारा विश्वास गहरा नहीं है। हम अपने उद्धार पर ही ठहर जायें और बाइबल के गहरे भेद जानने की कोशिश न करें तो हमारा मसीही जीवन व आत्मिक ज्ञान सतही रह जायेगा। इसलिये मैं सवाल पूछने वाले अपने विश्वासी भाई के इस सवाल की सराहना करता हूँ। क्योंकि परमेश्वर स्वयं हमसे यह कहता है कि गुप्त बातें जो ज्ञान से प्राप्त नहीं होती, जो प्रकट रूप से समझ नहीं आती उनके बारे में विचार करना, परमेश्वर से प्रकाशन की उम्मीद रखना और प्रार्थना करना परमेश्वर की इच्छा में है –

मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बढ़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता।

– यिर्मियाह 33:3

मैं इस बात पर भी विश्वास करता हूँ कि जो बातें बाइबल में परमेश्वर ने हमसे गुप्त रखी हैं और प्रकट नहीं की है, उनमें से कई प्रार्थनापूर्वक प्रभु से पूछने पर पता चल जाती है जिसे हम प्रकाशन कहते हैं जो कि ज्ञान से अलग है और पवित्र आत्मा के द्वारा हम पर प्रकट की जाती हैं। परंतु साथ ही यह भी मानता हूँ कि कई बातें परमेश्वर हम पर प्रकट नहीं करते वह परमेश्वर की योजना के अनुरूप है –

गुप्त बातें हमारे परमेश्वर यहोवा के वश में हैं; परन्तु जो प्रगट की गई हैं वे सदा के लिये हमारे और हमारे वंश में रहेंगी, इसलिये कि इस व्यवस्था की सब बातें पूरी ही जाएं।

– व्यवस्थाविवरण 29:29

यह भी सही है कि ऐसा सवाल करना एक बात है और इस बात का ज्ञान प्राप्त करना अच्छा भी है परंतु इससे बढ़कर यह जानना और हमेशा जाँचते रहना कि हम कहाँ जायेंगे और क्या स्वर्ग राज्य में प्रवेश करेंगे – यह भी अत्यंत ज़रूरी है।

अब इस बात पर विचार करते हैं कि आदम को स्वर्ग मिलेगा या नर्क?

बाइबल बहुत स्पष्ट तौर पर इस बात को प्रकट नहीं करती है और इसलिये बहुत से लोग मानते हैं कि आदम स्वर्ग में है और बहुत से कहते हैं कि पाप करने के कारण वह और हव्वा नर्क में है।

मेरा मानना है कि आदम और हव्वा स्वर्ग को स्वर्ग मिला है।

ध्यान दें कि मैंने यह नहीं कहा कि उन्हें स्वर्ग मिलेगा, बल्कि मैंने कहा कि उन्हें स्वर्ग मिल चुका है। मेरा ऐसा मानने के पीछे जो प्रकाशन प्रभु ने दिया है वो यह है – कि पापों की क्षमा मनुष्य कमा नहीं सकता परंतु परमेश्वर ही हमारे पाप क्षमा कर सकता है। आदम और हव्वा ने पाप किया और परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। इस प्रथम पाप के करने के बाद के तमाम पाप-कर्मों से बढ़कर यह सबसे बड़ा पाप है क्योंकि परमेश्वर की आज्ञा का प्रत्यक्ष रूप से उल्लंघन किया गया – यह परमेश्वर के लिये बिल्कुल भी ग्रहणयोग्य नहीं है। इसके पश्चात आदम और हव्वा ने पत्तों से अपने लिये कपड़े बनाकर, अपने कर्मों से अपने नंगेपन (पाप) को ढांपने का असफल प्रयास भी किया। उनके अपने कर्म और प्रयास से उनके पाप नहीं मिटे परंतु स्वयं परमेश्वर ने उनके लिये पहला बलिदान किया और उनके पापों को ढांपने का इंतज़ाम किया।

और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बना कर उन को पहिना दिए।

– उत्पत्ति 3:21

परमेश्वर इस समय तक सृष्टि का सारा काम कर चुके थे और इसलिये ऐसा सोचना कि परमेश्वर ने सिर्फ आदम और ह्ववा को पहनाने के लिये चमड़े का निर्माण किया होगा यह सही नहीं है। संभवतया परमेश्वर ने किसी भेड़ या मेमने का बलिदान कर उसके चमड़े से उनके लिये अंगरखे बनाये। परमेश्वर द्वारा आदम और हव्वा के लिये किया गया यह बलिदान सांकेतिक रूप से प्रकाशितवाक्य में बताये गये परमेश्वर के मेमने का प्रतिरूप था (प्रकाशितवाक्य 5:6, 13:8)।  बाइबल हमें बताती है कि जिसके पाप स्वयं परमेश्वर ढांप दे उसे कोई दंडित नहीं कर सकता। नीचे दिये वचन में पुत्र अर्थात पुत्र-परमेश्वर अर्थात स्वयं परमेश्वर यदि हमारे पापों से हमें मुक्त कर दे तो हम सचमुच ही पाप-मुक्त या दोषमुक्त हो जाते हैं।

सो यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे।

– यूहन्ना 8:36

हालांकि आदम और हव्वा के पाप परमेश्वर ने ढांप दिये फिर भी उनका उद्धार उनके जीते जी नहीं हुआ था जैसा कि आज आपका और हमारा होता है। हम आज जब अपने पापों की क्षमा प्रभु यीशु मसीह से मांगते हैं तो हमें तुरंत ही (जीते जी) क्षमा मिल जाती है, हम स्वर्ग राज्य के अधिकारी बन जाते हैं, हमारे पापों का लेखा-जोखा मिटा दिया जाता है जैसे कि हमनें कभी पाप ही नहीं किया और हमारा नाम जीवन की पुस्तक में सुरक्षित हो जाता है क्योंकि हमारे लिये परमेश्वर का सिद्ध मेमना स्वयं परमेश्वर का पुत्र प्रभु यीशु बलिदान हुआ और तीसरे दिन मृतकों में से जी भी उठा। प्रभु यीशु मसीह के इस सिद्ध पापों के पश्चाताप के बाद और कोई बलिदान की आवश्यकता नहीं है (इब्रानियों 10 को पूरा पढ़ें ताकि यह बात समझ आये)।

इंसान द्वारा चढाया गया मेमने का लहू पाप मिटाता नहीं है परंतु सिर्फ अगले पाप-बलि तक उसके ढांपता है परंतु प्रभु यीशु का लहू पवित्र है और सिर्फ पापों को ढांपता नहीं है बल्कि उनको मिटा देता है। आदम और हव्वा के पाप सिर्फ ढांप दिये गये और यह भी उनके अपने किये बलिदान से नहीं हुआ बल्कि परमेश्वर ने उनके लिये यह किया। उनसे ही सीख कर बाद में हाबिल ने परमेश्वर को भेंट चढाई – जबकि इस समय तक मूसा नहीं आया था और न ही परमेश्वर ने पाप के बदले बलिदान चढ़ाने की व्यवस्था मनुष्य को सिखाई थी।

परमेश्वर के द्वारा मूसा को व्यवस्था दिये जाने के बाद मनुष्य स्वयं एवं साल में एक बार महायाजक परमेश्वर के सम्मुख पापबलि करते थे और पापों की कवरिंग प्राप्त करते थे। परंतु आदम के लिये भेंट स्वयं परमेश्वर ने दी जिससे उनके पाप हमेशा के लिये ढांप दिये गये और वह धर्मी ठहरा। इसी कारण बाद में भी परमेश्वर ने उन्हें आशीष दी और अनेकों संतानों से फलवंत किया।

एक और सवाल उठता है कि मरने के बाद आदम के साथ साथ पुराने नियम के विश्वासी (अब्राहम, मूसा, दाऊद, दानिय्येल आदि) कहाँ गये, जिन्हें स्वयं परमेश्वर ने धर्मी बताया या बनाया, क्या वे स्वर्ग में हैं या फिर वे कहाँ है?

आदम और हरेक व्यक्ति मरने के बाद अधोलोक नामक स्थान पर जाते हैं जिसे अंग्रेजी में हेड्स (Hades) कहा गया है। इस अधोलोक में दो भाग हैं जिसमें से एक में सृष्टि की शुरुआत से लेकर आज तक हरेक दुष्ट एवं पापी मनुष्य अपनी मृत्यु के बाद रखे गये हैं जैसे कैन, नूह के समय के अनेक लोग, लूत के समय के दुष्ट एवं पापी लोग और आज तक के सभी पापी जो परमेश्वर के प्रेम पर विश्वास नहीं करते हैं परंतु प्रायश्चित एवं कर्मों के द्वारा अपना मोक्ष ठीक उसी प्रकार कमाने का प्रयास करते हैं जैसे आदम और हव्वा ने किया था।

इसके अलावा अधोलोक के दूसरे भाग में परमेश्वर के धर्मी लोग रखे गये हैं जैसे अब्राहम, मूसा, आदम, हाबिल, नूह, दाऊद, सभी नबी और हरेक विश्वासी जो प्रभु यीशु पर विश्वास करता है। लूका 16:19-31 में हम इसका चित्रण देखते हैं जहाँ धनी व्यक्ति अधोलोक की गर्मी में है और परेशान है जबकि लाजर अब्राहम की गोद में है और उनके बीच इतनी दूरी है कि उनके बीच किसी प्रकार का आदान-प्रदान और आना-जाना नहीं हो सकता।

प्रेरितों के काम 2:27, 31 और इफिसियों 4:9 में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु मसीह अपनी शारीरिक मृत्यु के पश्चात  अधोलोक में उतरे और उन सभी भक्तों का जो पुराने नियम के समय से हैं उनका उद्धार किया जैसा कि सभी जीवित विश्वासियों का प्रभु यीशु में विश्वास करने से हुआ है। यह वह समय है जब हरेक धर्मी व्यक्ति जो आदम और हव्वा से लेकर प्रभु यीशु के पुनर्त्थान तक परमेश्वर की नजर में धर्मी माने गये, उनके पाप मिटा दिये गये और उनके नाम जीवन की पुस्तक में शामिल कर दिये गये। उनके साथ ही वे सब जिन्होंने प्रभु यीशु से उद्धार पा लिया है, वे भी इस स्थान में (paradise) अब्राहम के साथ आनंदित हैं और प्रभु यीशु मसीह के राज्य के आने की बाट आनंद के साथ कर रहे हैं व शांति को पहुँचे हैं। [2 कुरिन्थियों 12:2-4, 5:6-9]

जब प्रभु यीशु का द्वितीय आगमन होगा और कलीसिया उठा ली जायेगी तब पहले जो प्रभु में सो गये हैं, जैसे पुराने नियम के धर्मी लोग एवं जो प्रभु यीशु में विश्वास करके मर गये हैं वे सब जी उठेंगे और स्वर्ग जायेंगे और साथ ही साथ जो विश्वास करते रहेंगे और जीवित होंगे वे भी ।

जब प्रभु का फिर से आगमन होगा तो हम जो जीवित हैं और अभी यहीं हैं उनसे आगे नहीं निकल पाएँगे जो मर चुके हैं। क्योंकि स्वर्गदूतों का मुखिया जब अपने ऊँचे स्वर से आदेश देगा तथा जब परमेश्वर का बिगुल बजेगा तो प्रभु स्वयं स्वर्ग से उतरेगा। उस समय जिन्होंने मसीह में प्राण त्यागे हैं, वे पहले उठेंगे। उसके बाद हमें जो जीवित हैं, और अभी भी यहीं हैं उनके साथ ही हवा में प्रभु से मिलने के लिए बादलों के बीच ऊपर उठा लिए जायेंगे और इस प्रकार हम सदा के लिए प्रभु के साथ हो जायेंगे।

– 1 थिस्सुलुनिकियों 4:15-17

हम सब प्रभु के द्वारा एक न्याय के लिये खड़े होंगे परंतु यह न्याय पापों का नहीं परंतु हमारे विश्वास, आज्ञाकारिता व सेवक के रूप में किये गये कामों का होगा जो प्रभु ने हमारे लिये ठहराये हैं। हम सब के विश्वास में आने के बाद के सभी कर्म (बुरे व अच्छे) सबके सामने दिखा दिये जायेंगे। जो मसीह में विश्वास कर भी समझौते का जीवन जीते हैं या जिस प्रकार का जीवन जीने की आज्ञा बाइबल हमें देती है, सेवा करने के विषय में हमें सिखाती है उससे अलग किसी और ही प्रकार का जीवन हम जीयें तो आग में झलसे व्यक्ति के समान मुश्किल से प्रवेश कर जायेंगे (1 Corinthians 3:15) परंतु जो प्रभु के साथ आज्ञाकारिता में चलते हैं वे सब अलग अलग प्रकार का फल पायेंगे और अनंत काल के लिये प्रभु यीशु की दुल्हन के समान पहले उसके साथ 1000 वर्ष राज्य करेंगे और फिर सर्वदाकाल के लिये स्वर्गराज्य में रहेंगे।

इसके विपरित पूर्वकाल के दुष्ट लोगों से लेकर इस समय तक के वे अविश्वासी व हठीले लोग जो प्रभु यीशु का इनकार करते हैं, वे पाप के दंड के लिये न्याय के लिये परमेश्वर के सम्मुख खड़े होंगे और नर्क का दंड पायेंगे।

जो मृतक सागर में थे, उन्हें सागर ने दे दिया, तथा मृत्यु और पाताल ने भी अपने अपने मृतक सौंप दिए। प्रत्येक का न्याय उसके कर्मो के अनुसार किया गया।  इसके बाद मृत्यु को और पाताल को आग की झील में झोंक दिया गया। यह आग की झील ही दूसरी मृत्यु है।  यदि किसी का नाम ‘जीवन की पुस्तक’ में लिखा नहीं मिला, तो उसे भी आग की झील में धकेल दिया गया।

– प्रकाशितवाक्य 20:13-15

किन्तु कायरों अविश्वासियों, दुर्बुद्धियों, हत्यारों, व्यभिचारियों, जादूटोना करने वालों मूर्तिपूजकों और सभी झूठ बोलने वालों को भभकती गंधक की जलती झील में अपना हिस्सा बँटाना होगा। यही दूसरी मृत्यु है।

– प्रकाशित वाक्य 21:8

यह सब जान लेने के बाद हमें इस बात का ज्ञान तो हो गया कि सचमुच आदम व सभी धर्मी लोगों का उद्धार हुआ है और वे स्वर्ग के अधिकारी बन गये हैं। आज विचार करने योग्य बिंदू यह है कि यह सब जान लेने के बाद भी क्या आप स्वर्ग के अधिकारी बन पाये हैं। क्या आपका जीवन परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुरूप है? क्या आप के काम (सेवा) और विश्वास आग की परीक्षा में सोने के समान और शुद्ध होकर चमकेंगे या फूस के समान जल जायेंगे।

यदि प्रभु यीशु मसीह आज आ जायें तो क्या आप साथ जाने के लिये तैयार हैं?

प्रभु आपको आशीष दें।

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